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Sunday, July 25, 2010

करीबी !!

मेरे कमरे की दीवार ,
मेरे हर दुःख को जानती है |
मेरे हर आंसू का,
कारण पहचानती  है |
जब मैं उदास होता हूँ,
तो वह कितनी चुपचाप होती है,
और जब होता हूँ व्यग्र,
थोडा चिंतित,
तब कितनी शांति से,
मेरी हर बात को सुनती है |
कभी कभी ,
रात रात भर मेरे साथ,
जागती है ;
और कभी ,
गले लगकर सोती है सारी रात  |
उसके रंग मेरा प्रतिबिम्ब हैं,
कभी देखो उस कोने को,
जब मैं रोया था बेसबब,
तब उसके भी आंसुओ की,
वह निशानी बाकी है |
वह बोली थी ,
हार गए,
अभी तो यह ज़िन्दगी आधी है |

3 comments:

वन्दना said...

वाह्…………………क्या अहसास हैं।

Mayank Goswami said...

shukriya ji :)

Anonymous said...

v true..
kayi baar humaari baatei sirf yeh deewarei hi samjh paati hai coz s u said they r the silent observers of our personality
and koi bhi insaan acha ya bura nahi hota everythin is relative shayad wo static rehti hai isliye walls are the best interpreter of this relative and dynamic world...