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Saturday, November 13, 2010

प्रेम - 3

काश कभी जो तुमसे शुरू हो ,
कोई एक ऐसी शाम हो जाए |
की गर तू कभी याद ना आए ,
तो ये शख्स गुमनाम हो जाए |
ज़िन्दगी में तू है, ये बहुत है  ,
ये सफ़र थोडा आसान हो जाए |
मैं क्यों तुझे यूँ देखू इस तरह,
कि तू बेवजह बदनाम हो जाए ?
ज़िन्दगी है रुक रुक के चलती है,
तेरी बाहों में ही अब शाम हो जाए | 
मैं थक जाता हूँ यहाँ पे आजकल,
अपना कन्धा दे, थोडा आराम हो जाए|
अब तू ही बस बोलती रहे सब कुछ,
मैं सुनु और दुनिया बेजुबान हो जाए | 

5 comments:

क्षितिजा .... said...

आपकी हर तमन्ना पूरी हो जाये!!.... बहुत खूब ...

Mayank Goswami said...

Shukriya kshitija ji....

Pramod Sharma said...

bahut hi sundar rachna hai.. lagta hai khud se jyada koi aur pyara lagne laga hai :)

Mayank Goswami said...

धन्यवाद प्रमोद ...

Tanu Shukla said...

Awesome,Mayank.....I really liked it. Mainly the lines "Mai thak jata hoon yahan pe aajkal, apna kandha de, thoda aaraam ho jaye".....Vah vah vah!!!