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Sunday, September 2, 2012

बिसरे शब्द ...


एक तीली ही तो जलानी है ..
फिर सब  ख़त्म ...
ये कुछ पन्ने,
जो फडफडा रहे हैं ..
फिर राख बन जायेगे ..
कौन  पढ़ेगा राख पे लिखे शब्द  ...

एक लहर ही तो आनी है ,
फिर सब  ख़त्म ...
ये कुछ अक्षर,
जो झिलमिला  रहे हैं,
फिर रेत बन जायेगें ..
कौन  पढ़ेगा  पानी में घुले  शब्द    ...

ये झौका ही तो आना है ,
फिर सब  ख़त्म  ...
ये कुछ अक्षर,
जो सरसरा रहे हैं,
फिर मरु बन जायेगें ..
कौन  पढ़ेगा हवा में उड़े  शब्द   ...

एक मौत ही तो आनी है ,
फिर सब  ख़त्म 
ये कुछ अक्षर,
जो गुनगुना रहे हैं,
फिर याद  बन जायेगें ..
कौन  पढ़ेगा याद में बिसरे  शब्द    ...

सब एक कहानी है ..
शब्दों से लिखी हुई.
सब आया ,
आग, पानी, हवा और मौत ...
बस एक तुम नहीं आये ...
आखिर तक ..

2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत गहन भाव लिए हुये

कौन पड़ेगा राख पे लिखे शब्द ...

पड़ेगा की जगह पढ़ेगा कर लीजिये ।

Mayank Goswami said...

धन्यवाद् संगीता जी .. गलती सुधार दी गई है ... अंग्रेजी लिखते लिखते हिंदी की वर्तनी बहुत प्रभावित (नकारात्मक रूप से ) हो गई है :( ..