कविताएं और भी यहाँ ..

Tuesday, January 12, 2010

रफ़्तार का अंदाजा नहीं है ...

रास्ते बनेगे कैसे, इसका कोई कायदा नहीं है,
जिंदगी बहुत तेज है रफ़्तार का अंदाजा नहीं है |

ये जब यु मिले है, खो भी जाना है इनको यहाँ,
क्या इन्हें पता है, इश्क को रहम आता नहीं है |

तुम्हारी जिन आदतों से परेशान था जो मैं कभी ,
कब दोहराएगा वो फिर तू, ये मुझे पता नहीं है |

कभी दो बूँद पानी ही ज़िन्दगी दे दे किसी को ,
पर कौन है यहाँ पे जो सागर का प्यासा नहीं है |

जीने के करीने कुछ अलग है जो जहाँ से हमारे,
मतलब ये है क्या कि हमें जीना आता ही नहीं है |

हद तो ये कि आँखे बंद करके बैठे है लोग यहाँ,
सच तो ये है मौत का डर किसको डराता नहीं है |

भूल जाने को बोल रहा है दिल हर खुशनुमा लम्हा,
वक़्त कि बर्बादी है, जब वो सपनो में भी आता नहीं है  |

करीने , सलीके, इज्ज़त, सऊर, लफ्जों का क्या करना,
जब यहाँ पे शराफत का कोई एक पैमाना ही नहीं है |

मुद्दतो से सोच रहे है बदल जाऊँगा एक दिन मैं भी,
पत्थर नहीं बदलते जब तक कोई  तराशता नहीं है |

ज़िन्दगी का वक़्त बेवक्त इम्तिहान लेता है वो रकीब ,
अब तक मुझे सीधे से जवाब लिखना ही आता नहीं है |

जला दो ख्वाबो को, किताबो को, दफना दो  दूर मुझसे,
दिल की सुनता हूँ,सिवा इसके कुछ  आता ही नहीं है ||