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Thursday, December 3, 2009

koshish

हर तरफ रोशनी बाटता फिर रहा है सूरज,

पर उस चाँद की कोशिश भी तो कम नहीं है |
जो भरपूर है पास तेरे उसके जाने का क्या ग़म,
कभी देकर वो देख जो तेरे पास ज्यादा नहीं है  |

1 comment:

मनोज कुमार said...

यह रचना बहुत अच्छी लगी।