कविताएं और भी यहाँ ..

Sunday, October 18, 2009

मैं चला जानिबे मंजिल ,
लेकर बस इतना सा सामान
टुकड़े टुकड़े जीना ..
टुकडा टुकडा अरमान
टुकडा टुकडा ज़िन्दगी
और एक मुट्ठी आसमान ...

8 comments:

sanjaygrover said...

हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....
www.samwaadghar.blogspot.com

Dil, Duniya aur Zindagi said...

Shukriya !!!

डॉ. राधेश्याम शुक्ल said...

poora aasman muthhee men rakhen, badhayee.

ललित शर्मा said...

आप सौभाग्यशाली मित्रों का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत में दीपावली में पदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको दीप पर्व की बधाई.
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं,
http://lalitdotcom.blogspot.com
http://lalitvani.blogspot.com
http://shilpkarkemukhse.blogspot.com
http://ekloharki.blogspot.com
http://adahakegoth.blogspot.com

नारदमुनि said...

wah ! javab nahi. narayan narayan

Amit K Sagar said...

चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
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हिंदी ब्लोग्स में पहली बार रिश्तों की नई शक्लें- Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान
(FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

GATHAREE said...

swagat hai blog jagat me

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com