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Wednesday, October 21, 2009

मैं प्रश्न बनना चाहता

मैं प्रश्न बनना चाहता हूँ,
और छोड़ देना चाहता हूँ,
कोशिश,
गंभीर होने की,
व्यापक,
निरर्थक उत्तर की तरह|
बस कुछ ऐसा,
की जो निकले ,
तो बाकी सभी ,
उसे हल करे,
मैं खुद को,
तलाशना बंद करके ,
ये जिम्मेदारी,
अब औरो को देकर,
एक प्रश्न की तरह,
सदैव ,
बना रहना चाहता हूँ,
की हर नयी पीढी,
आये,
मेरा उत्तर खोजे,
मुझे हल करे,
और मैं हमेशा वही रहू,
इसीलिए मैं प्रश्न बनना चाहता हूँ !!

3 comments:

MANOJ KUMAR said...

एक नई सोच, उम्दा रचना। बधाई।

Dil, Duniya aur Zindagi said...

शुक्रिया मनोज जी..
कोई सुधार की गुंजाइश हो तो, अवश्य बताइयेगा :)

Manish Nigam said...

अति उत्तम दोस्त